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‘सत्य है तो स्वयं के भीतर है।’ इसलिए किसी और से मांगने से नहीं मिल जाएगा। सत्य की कोई भीख नहीं मिल सकती। सत्य उधार भी नहीं मिल सकता। सत्य कहीं से सीखा भी नहीं जा सकता, क्योंकि जो भी हम सीखते हैं, वह बाहर से सीखते हैं। जो भी हम मांगते हैं, वह बाहर से मांगते हैं। सत्य पढ़…
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एकांत में प्रेमपूर्ण होने का प्रयोग करें खोजें टटोलें अपने भीतर।हो जाएगा होता है हो सकता है। जरा भी कठिनाई नहीं है। कभी प्रयोग ही नहीं किया उस दिशा में इसलिए खयाल में बात नहीं आ पाई है| निर्जन में भी फूल खिलते हैं और सुगंध फैला देते हैं।निर्जन में एकांत में प्रेम की सुगंध को पकड़ें। जब एक बार…